ज़िंदगी एक खाने की थाली है,
जिसमें गम ज्यादा,
और खुशी कम तादाद में परोसी रहती है।
ग़मों को खूब चबा चबा कर खाओ कि,
वो इतने हजम हो जाएं कि,
ज़िंदगी उनको आसानी से झेल ले।
खुशियों को धीरे धीरे चुस्कियां लेते हुए पियो,
की ज़िंदगी उनके खुशनुमा रंगों में डूब जाए।
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